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रुपये में 14 साल की सबसे बड़ी गिरावट, वित्त वर्ष 2025-26 में 10% कमजोर हुई भारतीय मुद्रा

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 31, 2026 06:52 am IST,  Updated : Mar 31, 2026 06:53 am IST

वित्त वर्ष 2025-26 में असर डालने वाले कारक 2011-12 के कारकों से अलग हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में मुद्रा की शुरुआती गिरावट तब शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाए, जिससे डॉलर की मांग में भारी उछाल आया।

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अमेरिकी टैरिफ के बाद पश्चिम एशिया में बिगड़े माहौल ने रुपये पर डाला दबाव Image Source : PTI

Indian Rupee vs US Dollar: वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय मुद्रा रुपये में डॉलर के मुकाबले 9.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो 14 साल में डॉलर के मुकाबले सबसे बड़ी गिरावट है। वित्त वर्ष 2011-12 में, रुपये में डॉलर की तुलना में 12.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय चालू खाते का घाटा बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गया था। जबकि, वित्त वर्ष 2025-26 में, रुपये में दर्ज की गई इस भारी गिरावट के पीछे विदेशी फंड्स की लगातार निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर डॉलर का मजबूत होना प्रमुख वजहें रहीं।

डॉलर की तुलना में कैसा रहा बाकी एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन

वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और नकदी की तंगी ने भी 2025-26 में रुपये पर और दबाव डाला। बाजार के जानकारों के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक दूसरी एशियाई मुद्राओं में भी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट देखी गई है। चालू वित्त वर्ष में अमेरिकी डॉलर की तुलना में जापानी येन 6 प्रतिशत, फिलिपीन की मुद्रा पीसो 5.74 प्रतिशत और दक्षिण कोरियाई वॉन 2.88 प्रतिशत कमजोर हुआ है। दक्षिण कोरियाई बैंक शिन्हान बैंक के भारत में ट्रेजरी प्रमुख, सुनल सोधानी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 बाहरी झटकों, पूंजी के बाहर जाने और ढांचागत कमजोरियों जैसी कई समस्याओं के एक साथ आने की वजह से रुपया कमजोर हुआ है। 

अमेरिकी टैरिफ के बाद पश्चिम एशिया में बिगड़े माहौल ने रुपये पर डाला दबाव

सुनल सोधानी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में असर डालने वाले कारक 2011-12 के कारकों से अलग हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में मुद्रा की शुरुआती गिरावट तब शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाए, जिससे डॉलर की मांग में भारी उछाल आया। बाद में, इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव की स्थिति ने हालातों को और भी ज्यादा खराब कर दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गईं और रुपये पर दबाव और तेज हो गया। 

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